आत्मविश्वास : पारस्परिक जिम्मेदारी

जीवन साथियों के गहरे संबंध में व्यक्ति केवल किसी के साथ समय नहीं बिताता, बल्कि अपने मन, भावनाओं, सपनों और कमजोरियों का एक हिस्सा दूसरे के साथ साझा करता है। इसलिए जीवन साथियों में केवल प्रेम होना पर्याप्त नहीं है, अपितु उस प्रेम में साथ का आत्मविश्वास होना भी उतना ही आवश्यक है। यह विश्वास […]

रिश्तों में रंग बदलते लोग

प्रमोद कुमार समय बदल रहा है। समाज बदल रहा है। लोगों की प्राथमिकताएँ बदल रही हैं और उनके साथ रिश्तों को देखने का नजरिया भी बदलता जा रहा है। कभी संबंध जीवन की पूंजी हुआ करते थे, आज कई बार वे सफलता की सीढ़ी बनते दिखाई देते हैं। जिन लोगों के साथ हमने जीवन के […]

सुविधा और संवेदना में विरोधाभास

सुविधा कहती है जब मेरे पास समय हो, तब तुम मुझसे बात करो। संवेदना कहती है जब तुम्हें मेरी जरूरत हो, मैं अपनी व्यस्तता में से भी तुम्हारे लिए थोड़ा समय निकालूँगा। सुविधा कहती है मेरा मूड खराब है, इसलिए मुझे अकेला छोड़ दो। संवेदना कहती है तुम्हारा मूड खराब है, मैं तुम्हें परेशान नहीं […]

जैसा चाहिए वैसा देना भी सीखो

जीवन में हर व्यक्ति चाहता है कि उसे कोई ऐसा साथी मिले, जो उसके सुख-दुःख में उसके साथ खड़ा रहे, उसकी भावनाओं को समझे, उसकी परेशानियों में उसका सहारा बने और जीवन की कठिन राहों पर उसका हाथ थामे रखे। लेकिन एक सच्चे और जीवनपर्यंत चलने वाले संबंध की शुरुआत केवल इस अपेक्षा से नहीं […]

आजकल का प्यार : रिश्ते चाहिए, अपनी सुविधा के अनुसार

रिश्ते चाहिए, अपनी सुविधा के अनुसार आज के समय में प्यार शायद पहले से अधिक दिखाई देता है, लेकिन महसूस कम होता है। रिश्ते पहले से अधिक हैं, बातचीत के साधन पहले से अधिक हैं, एक-दूसरे तक पहुँचने की सुविधाएँ पहले से अधिक हैं, लेकिन फिर भी मनुष्य के भीतर अकेलापन बढ़ता जा रहा है। […]

मन पर संकल्प का शासन

परिचय- हम सभी ने सुना होगा कि “मन के हारे हार है, मन के जीते जीत” है I अर्थात हार-जीत का महत्व जितना व्यवहारिक जीवन में है, उससे कहीं ज्यादा आपके मन के स्तर पर महसूस करने का सम्बन्ध है I बहुत से लोगों को यह कहते हुए सुना होगा कि हम करना तो चाहते […]

असंतुष्टि के दो कारण

परिचय- जीवन में असंतुष्ट होना हमेशा गलत के लिए नहीं होता, आप सभी भी होते हैं, आपका उद्देश्य पावन एवं बड़ा होते हुए भी, आपकी सोच सकारात्मक पर भी हो सकता है यह आपमें असंतुष्टि का कारण बने I संतोषी सदा सुखी यह बात तो सत्य है, साथ ही क्या यह अवधारणा सही है कि […]

तनाव (Stress) एवं नकारात्मकता (Negativity)

परिचय- भारत में तनावग्रस्त जीवन जीने वालों का प्रतिशत एक जटिल मुद्दा है, जिस पर कई अध्ययनों और सर्वेक्षणों में अलग-अलग आंकड़े बताए गए हैं। कुछ अध्ययनों में 77% से 90% तक लोग तनावग्रस्त बताए गए हैं, जबकि अन्य में 31% या 22% लोगों ने तनाव का अनुभव किया है. यहां कुछ प्रमुख बिंदु दिए गए […]

आश्रय लेना मनुष्य का स्वभाव है .

आश्रय लेना मनुष्य का स्वभाव है

आश्रय लेना मनुष्य का स्वभाव है मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, और उसकी प्रवृत्ति में आश्रय लेना एक प्राकृतिक प्रक्रिया रही है। जन्म से लेकर मृत्यु तक, मनुष्य किसी-न-किसी रूप में आश्रय लेता है — कभी माता-पिता का, कभी समाज का, कभी प्रकृति का, तो कभी ईश्वर का। यह आश्रय केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक, […]

बड़ी चुनौती बनेंगी देश में घटते वन-क्षेत्र

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भारत में घटते वन-क्षेत्र एक बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। वन-उपवनों से सुसंपन्न भारत अपनी प्राकृतिक सम्पदा और सौंदर्य के लिए विश्व में प्रसिद्ध था। लेकिन विकास की अन्धानुकरण में वन क्षेत्र लगातार घट रहे हैं। सरकारी नीतियों और निजी क्षेत्र के अतिक्रमण से भारत का वनावरण क्षेत्र अब केवल 24 प्रतिशत रह गया है। यदि वन संरक्षण के ठोस प्रयास नहीं किए गए, तो भविष्य भयावह होगा।