परिचय-

भारत में तनावग्रस्त जीवन जीने वालों का प्रतिशत एक जटिल मुद्दा है, जिस पर कई अध्ययनों और सर्वेक्षणों में अलग-अलग आंकड़े बताए गए हैं। कुछ अध्ययनों में 77% से 90% तक लोग तनावग्रस्त बताए गए हैं, जबकि अन्य में 31% या 22% लोगों ने तनाव का अनुभव किया है.

यहां कुछ प्रमुख बिंदु दिए गए हैं:-

2017 में, एक रिपोर्ट में बताया गया था कि 90% भारतीय तनाव से पीड़ित हैं।

2024 में, DW के एक अध्ययन के अनुसार, 77% लोगों में तनाव का कम से कम एक लक्षण पाया  गया।

31 देशों में किए गए एक Ipsos सर्वेक्षण के अनुसार, 31% भारतीयों ने कम से कम एक बार तनाव  का अनुभव किया।

22% भारतीय लगातार तनावपूर्ण माहौल में रहते हैं, Ipsos के अनुसार।

कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि युवा पीढ़ी, विशेष रूप से जेन-जी (1994 से 2009 के बीच  पैदा हुए लोग), पिछली पीढ़ियों की तुलना में अधिक                 तनावग्रस्त  हैं।

भारत में महिलाओं में तनाव ग्रस्त होने का प्रतिशत एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, और कई अध्ययनों से पता चलता है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक तनावग्रस्त होती हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार, 50% भारतीय महिलाएं विभिन्न दबावों के कारण दीर्घकालिक तनाव का अनुभव करती हैं, India Today के अनुसार. एक अन्य अध्ययन में, 75% महिलाओं ने उच्च तनाव स्तर की बात कही, Truworth Wellness के अनुसार.

तनाव के कई कारण हैं, जिनमें काम का दबाव, घर की जिम्मेदारियां, और सामाजिक-आर्थिक कारक शामिल हैं. कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक काम का बोझ और घर की जिम्मेदारियां उठानी पड़ती हैं, जिससे तनाव और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. इसके अतिरिक्त, महिलाओं को अक्सर सामाजिक भेदभाव और आर्थिक असमानता का सामना करना पड़ता है, जो उनके तनाव के स्तर को और बढ़ा सकता है.

हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये आंकड़े समग्र तस्वीर का प्रतिनिधित्व करते हैं और हर महिला एक ही स्तर के तनाव का अनुभव नहीं करती है. व्यक्तिगत अनुभव अलग-अलग हो सकते हैं, और कुछ महिलाएं दूसरों की तुलना में तनाव का प्रबंधन करने में बेहतर हो सकती हैं.

लेखक: प्रमोद कुमार
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