परिचय-

जीवन में आगे बढ़ने का मार्ग आपके व्यक्तित्व में समाहित विभिन्न गुणों एवं सदाचारों से होकर गुजरता है I यह निश्चित है, कि मानवीय मर्यादाओं एवं उत्कृष्ठ जीवन मूल्यों से सिंचित व्यक्तित्व ही भविष्य में आपके लिए सफलता के द्वार खोलता है I  बाह्य प्रभावों के अतिरिक्त आपका आत्मबल एवं आपके अनुभवों सहित आपकी विकसित दृष्टि के अनुरूप निर्मित आपका विवेक ही आपको परिपूर्ण बनाता है I आपकी समाज में पहचान आपके साथ आपकी परछाई की तरह सदैव चलने वाली है, कई बार हम अपने अहंकार में भूल जाते हैं कि हमें करना क्या चाहिए और हम कर क्या रहे हैं ? बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जिन्हें यह बात समय रहते समझ आ जाती है, कुछ लोगों को जब समझ आती है तब बहुत देर हो जाती है और कुछ ऐसे भी होते हैं, जिन्हें उम्रभर समझ ही नहीं आती, वही दया के पात्र हैं I आज हम अपने व्यक्तित्व में एक अत्यंत महत्वपूर्ण सद्गुण धैर्यशीलता की बात करेंगे I

जीवन की दिशा : धैर्य

महिलाओं में धैर्य उनका आभूषण होता है तो वहीं पुरुषों के लिए धैर्य उनका अस्त्र हुआ करता है I आपका धैर्य आपको सफलता, यश और आपकी परिपक्व प्रदान करवाने हेतु अत्यंत दुर्लभ सद्गुण है I जिसमें यह है, वह अनेकों प्रकार से शांत, सफल और सबल होता है I इस सद्गुण को विकसित होने के लिए आपके संस्कार एवं आपकी जीवनशैली का बहुत प्रभाव पड़ता है I  हमारे जीवन की प्राथमिकतायें, हमारे लक्ष्य, हमारी कार्य करने की शैली, हमारे आसपास का वातावरण, हमारी संगती, हमारे चित्त की अवस्था यह सभी हमारे धैर्यशीलता के लिए खादपानी का काम करते हैं I आपके जीवन में आपने अनुभव आपकी विवेक की तुला पर रख कर देखेंगे तो समझ में आएगा हम कैसे शांत रहें, हमें समाज से, इस सम्पूर्ण श्रृष्टि से क्या लेना और क्या छोड़ना है, किस पर काम करना है और किस रास्ते नहीं जाना है I किसे पकड़ें और किसे छोड़ें, कौन अपना और कौन पराया, हमें सबकुछ करना है अथवा हमें वो करना है, जिसके लिए हमारा जन्म हुआ है, आखिर हम करना क्या चाहते हैं, क्यों करना चाहते हैं,किसके लिए करना चाहते हैं, कैसे करना चाहते हैं ? यह सभी हमारे वैचारिक अव्ययव हमारी जीवन धारा की दशा दिशा तय करते हैं I और यह सब आप अपने धैर्य पूर्ण व्यक्तित्व के कारण ही कर सकते हैं I

वर्तमान पीढ़ी में धैर्य का आभाव क्यों ?

आज समाज में अर्थात वर्तमान पीढ़ी में न धैर्य शीलता का आभाव दिखता है, पिछले दशकों में देखा होगा युवाओं में कठिन परिस्थितियों को सहने और धीरे-धीरे लक्ष्य प्राप्त करने का धैर्य अधिक होता था, लेकिन आधुनिक जीवनशैली के कारण इस सद्गुण का बहुत आभाव दिख रहा है इसके प्रमुख कारण हैं

  1. तेज़ तकनीक और इंटरनेट : आज के समय में सब कुछ तुरंत मिल जाता है, खाना, जानकारी, मनोरंजन। इससे “इंस्टेंट रिज़ल्ट” की आदत बन जाती है और प्रतीक्षा करने की क्षमता कम हो जाती है। आजकल तो किसी की बात सुनने के लिए रील और विडियो को फ़ास्ट करने देखने का प्रचलन देखा होगा I
  2. सोशल मीडिया का प्रभाव : सोशल मीडिया पर दूसरों की सफलता देखकर युवाओं को लगता है कि सफलता जल्दी मिलनी चाहिए। जब ऐसा नहीं होता तो निराशा और अधैर्य बढ़ जाता है। आपकी पराजय भी आपको बहुत कुछ सिखा कर जाती है, किन्तु उससे सीख लेने का विवेक नहीं लोगों और तो और पराजय के भय के कारण बहुत से लोग जीवन में कुछ कर ही नहीं पाते, ऐसे भी लोग हैं I
  3. प्रतिस्पर्धा और तनाव : पढ़ाई, नौकरी और करियर की बढ़ती प्रतिस्पर्धा युवाओं में मानसिक दबाव बढ़ाती है, इससे भी युवाओं में धैर्य कम हो रहा है।
  4. परिवार और समाज में बदलाव : पहले संयुक्त परिवारों में बच्चों को अनुभव और मार्गदर्शन मिलता था। अब एकल परिवारों में यह सीख कम मिलती है। एकांकी जीवन में लोगों को सहन करने की क्षमता घट रही है, किसी और को स्वीकार करने, अपनी निजता को अपना किला बनाकर रखने का प्रचलन बढ़ा है, दोहरे चरित्र विकसित हो रहे हैं I
  5. तुरंत संतुष्टि की संस्कृति : आज के दौर में लोग जल्दी परिणाम चाहते हैं, जैसे जल्दी पैसा, जल्दी सफलता, जल्दी प्रसिद्धि। इससे लंबी मेहनत करने की प्रवृत्ति कम हो जाती है। कम परिश्रम में अधिक मिल जाये, सोचा और हो जाये, काम कम और आईडिया का पैसा मिले, यह चाह युवाओं को गहरे दलदल में ले जा रही है I

पीढ़ी पर दुष्प्रभाव : समीक्षा

आज युवाओं में निर्णय लेने में जल्दबाज़ी का प्रचलन बढ़ रहा है, हमारी वर्तमान पीढ़ी में तनाव एवं चिंता की प्रवृति बढती जा रही है I असफल होने का डर भी युवाओं में बढ़ रहा है, अतः असफलता को सहन न कर पाने क्षमता घट रही है I आपसी रिश्तों में टकराव का प्रमुख कारण भी धैर्यशीलता का आभाव ही है I फोन एवं डिजिटल व्यवस्थाओं पर बढती निर्भरता, कम परिश्रम में अधिक की चाह इस बढती प्रवृति के कारण युवक युवतियों में धैर्य की क्षमता घट रही है I

युवा कैसे बढ़ाएं धैर्यशीलता

अपने जीवन में ध्यान और योग बढ़ाएं जिससे आपका  मानसिक संतुलन बढेगा, आपकी एकाग्रता, मन की शांति, आत्मबल की मजबूती बढ़ेगी, युवा अपने जीवन में लंबी अवधि के लक्ष्य बनायें, जिससे आपकी जिंदगी के प्रति सकारत्मक उम्मीद बनी रहे I आजकल के युवा अपने जीवन में सोशल मीडिया का सीमित उपयोग करें, एवं अव आवश्यक रूप से अपने परिवारजनों एवं  शिक्षकों का मार्गदर्शन समय समय पर प्राप्त करते रहें, यह कहना भी अतिश्योक्ति नहीं होगी कि आप उन्हीं के मार्गदर्शन में अपना जीवन व्यतीत करें तो अच्छा है I युवा अपनी अपनी पढाई एवं अन्य प्राथमिकताओं के साथ-साथ खेल, एवं  रचनात्मक गतिविधियों में भी खूब भाग लें, अतः सभी यह ध्यान रहे, धैर्य जीवन की सफलता का महत्वपूर्ण गुण है। यदि युवा धैर्य, परिश्रम और सकारात्मक सोच को अपनाएँ, तो वे अपने जीवन और समाज दोनों को बेहतर बना सकते हैं।

 

लेखक: प्रमोद कुमार
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